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 गणेश प्रसाद वर्णी की 153वीं जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई

विजय कुमार, रिपोर्टर

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वाराणसी। श्री स्याद्वाद महाविद्यालय, भदैनी के संस्थापक गणेश प्रसाद वर्णी की 153वीं जन्मजयंती श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र, भेलूपुर में मनाई गई। कार्यक्रम मुनि धर्मसागर महाराज एवं मुनि भावसागर महाराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।


कार्यक्रम में प्रोफेसर फूलचन्द जैन ‘प्रेमी’, प्रोफेसर अशोक कुमार जैन, संजय जैन, उपाध्यक्ष दिगम्बर जैन समाज, किशोरकांत गोरावाला, विनोद जैन तथा महाविद्यालय के प्रबंधक विजय कुमार जैन ने गणेश प्रसाद वर्णी एवं जैन आचार्यों के चित्रों का अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया।

इस अवसर पर मुनि भावसागर महाराज ने कहा कि गणेश प्रसाद वर्णी ने देशभर में अनेक शिक्षण संस्थाओं एवं गुरुकुलों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष परिस्थितियों में उन्होंने वाराणसी में श्री स्याद्वाद महाविद्यालय की स्थापना की।

उन्होंने बताया कि गणेश प्रसाद वर्णी जन्म से जैन नहीं थे, बल्कि पद्मपुराण के स्वाध्याय के माध्यम से जैन धर्म से जुड़े। वहीं प्रोफेसर अशोक कुमार जैन ने कहा कि वर्णी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समझने के लिए उनकी कृति ‘मेरी जीवन गाथा’ का अध्ययन सभी को करना चाहिए।

ब्रह्मचारी प्रदीप ‘पीयूष भैया’ ने कहा कि गणेश प्रसाद वर्णी का समाज के उत्थान में अतुलनीय योगदान रहा है। महाविद्यालय के प्रबंधक विजय कुमार जैन ने कहा कि गणेश प्रसाद वर्णी जैन ग्रंथों के स्वाध्याय से जैन धर्म की ओर आकर्षित हुए और उन्होंने शिक्षा तथा समाज सेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया।

मुनि धर्मसागर महाराज ने कहा कि संसार में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो शरीर से संसार से विदा होने के बाद भी अपने कार्यों एवं आदर्शों के कारण मानव मानस पटल पर सदैव विद्यमान रहते हैं। गणेश प्रसाद वर्णी ऐसे ही महान साधक थे।महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर फूलचन्द जैन ‘प्रेमी’ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गणेश प्रसाद वर्णी की जीवनगाथा अवश्य पढ़नी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार जैन ‘आकाश’ ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुरेंद्र जैन ने किया।

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