आईएमएस-बीएचयू में “स्वास्थ्य अनुसंधान में आर्थिक मॉडलिंग” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ
वाराणसी। चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (आईएमएस-बीएचयू) स्थित हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया (HTAIn) रिसोर्स सेंटर द्वारा “स्वास्थ्य अनुसंधान में आर्थिक मॉडलिंग: मॉडल विकास से साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण तक” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय व्यावहारिक कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य नीति निर्माण के लिए भारतीय शोधकर्ताओं में स्वदेशी क्षमता विकसित करना है।
उद्घाटन समारोह में आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार मुख्य अतिथि तथा फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन प्रो. संजय गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. संखवार ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति को स्वास्थ्य अर्थशास्त्र से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने समान स्वास्थ्य पहुंच, उपचार की लागत-प्रभावशीलता और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिरता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शैक्षणिक चिकित्सा संस्थानों को घरेलू आर्थिक साक्ष्य तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े नीतिगत निर्णय जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित हों।
विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि चिकित्सा शिक्षकों और शोधकर्ताओं में विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करना भारतीय नैदानिक अनुसंधान के भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने मार्कोव मॉडल, डिसीजन ट्री और लागत-प्रभावशीलता विश्लेषण जैसी पद्धतियों को शोध के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए HTAIn रिसोर्स सेंटर के प्रधान अन्वेषक (PI) एवं सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज पाण्डेय ने स्वास्थ्य सेवाओं में आर्थिक मॉडलिंग की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्लीनिकल ट्रायल किसी उपचार की प्रभावशीलता का आकलन करते हैं, जबकि स्वास्थ्य आर्थिक मॉडलिंग व्यापक आबादी के स्तर पर किसी हस्तक्षेप की लागत, प्रभाव और स्थिरता का मूल्यांकन करने में मदद करती है।
उन्होंने भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा देश की परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य-आर्थिक साक्ष्य विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आईएमएस-बीएचयू का HTAIn रिसोर्स सेंटर एक सक्रिय नोडल केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। केंद्र द्वारा डीएचआर सचिवालय को पांच प्रमुख राष्ट्रीय हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट (HTA) अध्ययन सौंपे जा चुके हैं। इनमें मैकेनिकल हार्ट वाल्व, स्मार्टफोन आधारित नेत्र जांच उपकरण और सर्वाइकल कैंसर के लिए HPV सेल्फ-सैंपलिंग सहित विभिन्न विषय शामिल हैं। केंद्र से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में 21 शोध पत्र भी प्रकाशित किए गए हैं।
दो दिवसीय कार्यशाला में देशभर से संकाय सदस्य, शोधकर्ता, नीति विश्लेषक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवर भाग ले रहे हैं। विशेषज्ञों द्वारा आर्थिक मॉडलिंग, R सॉफ्टवेयर, लागत मापन, स्वास्थ्य परिणामों के मूल्यांकन, ICER, सांख्यिकीय तकनीकों, डिसीजन-ट्री मॉडल, मार्कोव स्टेट-ट्रांजिशन मॉडल तथा संवेदनशीलता और अनिश्चितता विश्लेषण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला में डॉ. आकाशदीप सिंह चौहान, डॉ. बीजू सोमन, डॉ. हर्षिका खन्ना, डॉ. मलयसामी मुनियादी, डॉ. निधि शर्मा, डॉ. ओशिमा सचिन, डॉ. शोमिक रे और डॉ. अर्चना ठाकुर सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे रहे हैं। समापन सत्र में प्रो. मनोज पाण्डेय द्वारा मॉडल सत्यापन, रिपोर्टिंग दिशानिर्देश और वैज्ञानिक पुनरुत्पादकता पर व्याख्यान दिया जाएगा।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारतीय बायोमेडिकल शोधकर्ताओं, स्वास्थ्य अर्थशास्त्रियों और सांख्यिकीविदों की नई पीढ़ी को आधुनिक मात्रात्मक मॉडलिंग उपकरणों से प्रशिक्षित करना है, ताकि नैदानिक और आर्थिक साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी एवं नीति-उपयोगी राष्ट्रीय स्वास्थ्य निर्णयों में योगदान दिया जा सके।
रिपोर्ट: विजय कुमार वाराणसी
जन जन की आवाज न्यूज़ 24


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