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 सौलत पब्लिक लाइब्रेरी का 92वां स्थापना दिवस, ‘लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी’ पर हुई गोष्ठी

जन-जन की आवाज़ न्यूज़ 24 रामपुर

ब्यूरो चीफ रफीउल्लाह खान की रिपोर्ट

रामपुर। रामपुर की ऐतिहासिक सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के 92वें स्थापना दिवस के अवसर पर लाइब्रेरी के अल्हाज हिमायत उल्लाह खान हॉल में ‘लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के अध्यक्ष डॉ. महमूद अली खान ने की।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर अज़ीज़ उद्दीन हुसैन हमदानी तथा विशिष्ट वक्ताओं के रूप में डॉ. इश्तियाक़ आलम आज़मी, मुस्लिम कॉलेज मुरादाबाद, सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज ख़लील अहमद खान, दलित चिंतक कमल भारती, अब्दुल्ला तारिक़ और डॉ. हसन अहमद निज़ामी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुऐब रज़ा खान वारसी ने किया।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सौलत पब्लिक लाइब्रेरी की आधिकारिक वेबसाइट और लाइब्रेरी की पत्रिका ‘तर्जुमाने सौलत’ का विमोचन भी किया गया।


गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. सैयद अनवारुल हसन कादरी द्वारा कुरान की तिलावत से हुआ। इसके बाद मजहर मियां रामपुरी ने नात पेश की। गोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर ज़हीर रहमती और सौलत लाइब्रेरी के प्रवक्ता जीशान मुहम्मद खान मुराद ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।

लोकतंत्र में समान अधिकारों पर जोर

गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी को अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि बहुसंख्यक समाज को बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।


वक्ताओं ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समाज भी देश के प्रति उतना ही वफादार और देशप्रेम से ओत-प्रोत है, जितना कोई अन्य देशवासी। उन्होंने कहा कि इंसान की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि धर्म, जाति, वर्ग अथवा संप्रदाय से।

वक्ताओं ने भारत की संत-महात्माओं और सूफी-फकीरों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाओं में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था और उनकी कृपा सभी के लिए समान रही।

सर सैयद अहमद खान के विचारों का उल्लेख

गोष्ठी में सर सैयद अहमद खान के विचारों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनकी दृष्टि में व्यक्ति की अहमियत उसकी प्रतिभा और योग्यता से तय होती है। उन्होंने लोगों से बहुमुखी प्रतिभा विकसित करने और अपनी योग्यता के बल पर समाज में स्थान बनाने का आह्वान किया था।

ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में मौलाना मुहम्मद असलम जावेद उल कासमी, डॉ. मेहंदी हसन, इसरार हसन खान, डॉ. सैयद जाफर शाह, शाहिद अली खान, फज़ल शाह फ़ज़ल, अज़हर इनायती, महमूद रिज़वी एडवोकेट, डॉ. जावेद नसीमी, ज़फ़र सुखनैन, एडवोकेट सैयद आमिर मियां, ज़ुबैद खान, अदनान नाज़िम, रिज़वान अहमद सिद्दीकी, सद्दाम हुसैन सिद्दीकी, डॉ. तबस्सुम साबिर, फाईज़ा ज़ुबैर, फहीमा बी, लाइब्रेरियन मजहर मोईन खान, शहजादा रिजवान खान, इरफान उर रहमान खान और इशरत अली सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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