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भारतेंदु हिंदी समाज का वह आसमान हैं, जिसमें अंतर्विरोध भी समाहित हैं : व्योमेश शुक्ल

भारतेंदु भवन में भारतेंदु हरिश्चंद्र की 177वीं जयंती पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

वाराणसी (काशीवार्ता)। हिंदी भाषा और साहित्य के उन्नायक भारतेंदु हरिश्चंद्र की 177वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को उनके आवास भारतेंदु भवन में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में भारतेंदु हरिश्चंद्र के जीवन, व्यक्तित्व, साहित्यिक योगदान और हिंदी समाज पर उनके व्यापक प्रभाव को लेकर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल रहे। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की जीवन-यात्रा और उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतेंदु एक ओर मर्यादा का नाम हैं, तो दूसरी ओर मर्यादा के विवेकसम्मत अतिक्रमण का भी।

व्योमेश शुक्ल ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व में शास्त्र और लोक, ज्ञान और कला, अभिजनता और साधारणता, स्त्री और पुरुष, हिंदी और अंग्रेजी तथा खड़ी बोली और ब्रज जैसे अनेक अंतर्विरोधों को समाहित किया था। उन्होंने कहा कि भारतेंदु का व्यक्तित्व हिंदीभाषी समाज के लिए एक ऐसे आसमान की तरह है, जिसके नीचे धरती, वृक्ष, फल-फूल और हमारे प्राणों को निर्धारित करने वाली सांस तक मौजूद है।


उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के साहित्यिक और सामाजिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। भारतेंदु ने अपने लेखन और सार्वजनिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी समाज में नई चेतना और विचार की जमीन तैयार करने का कार्य किया।

अध्यक्षीय संबोधन

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए आयुष राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने भारतेंदु हरिश्चंद्र और उनके कृतित्व से जुड़े स्मारकों के साथ अपने जीवन एवं सार्वजनिक जीवन के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की साहित्यिक विरासत और उनके स्मारकों के महत्व को रेखांकित किया।

अतिथियों का स्वागत

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन प्रतीक शर्मा ‘विधु’ ने किया। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का स्वागत भारतेंदु बाबू के वंशज दीपेश चंद्र चौधरी ने किया। संगोष्ठी के दौरान भारतेंदु हरिश्चंद्र के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में डॉ. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. अनुराग टंडन, डॉ. आमोद दत्त शास्त्री, पवन, अरविंद कुमार, शिवदत्त द्विवेदी, सिराज अहमद और भरत गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के माध्यम से भारतेंदु हरिश्चंद्र की साहित्यिक विरासत, हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान और हिंदी समाज में उनके व्यापक प्रभाव को याद किया गया।

रिपोर्ट: विजय कुमार वाराणसी
जन-जन की आवाज़ न्यूज़ 24

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