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 कुशीनगर की ऐतिहासिक धरोहर: मां कूलकुल्या देवी धाम से जुड़ी है गौरवशाली परंपरा

दिलीपनगर रियासत के संरक्षण में भव्य रूप ले चुके थे चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि मेले

कुशीनगर। कुशीनगर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में मां कूलकुल्या देवी धाम का विशेष महत्व बताया जाता है। कसिया स्थित बौद्ध तीर्थ से लगभग छह मील दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित प्राचीन कुलकुल्यास्थान वन क्षेत्र में छोटी नदी (कुल्या) के तट पर मां दुर्गा का पावन धाम स्थित है, जिसे श्रद्धालु कूलकुल्या देवी अथवा कुलवा देवी के नाम से जानते हैं।


धार्मिक मान्यता के अनुसार कुल्या नदी के कूल (तट) पर स्थित होने के कारण माता का नाम कूलकुल्या देवी पड़ा। मंदिर परिसर के समीप प्राचीन कूलकुल्येश्वर महादेव का शिवलिंग भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धाम की विशेषता यह भी बताई जाती है कि यहां पशुबलि की परंपरा नहीं है और पूजा-अर्चना सात्विक रूप से किए जाने की परंपरा रही है।

वर्ष में दो बार लगता है विशाल मेला

मां कूलकुल्या देवी धाम पर चैत्र नवरात्रि/रामनवमी तथा शारदीय नवरात्रि-दशहरा के अवसर पर मेले आयोजित किए जाने की परंपरा रही है। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख मिलता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ इन मेलों का क्षेत्र की लोक-संस्कृति और सामाजिक जीवन में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है।


दिलीपनगर रियासत से जुड़ा इतिहास

कूलकुल्या देवी धाम और यहां आयोजित होने वाले मेलों की परंपरा का संबंध दिलीपनगर (कुंडवा) रियासत से भी बताया जाता है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार रियासत के शासक सम्पति कुमार सिंह के संरक्षण और प्रबंधन में चैत्र तथा शारदीय नवरात्रि के मेलों को भव्य स्वरूप मिला।


बताया जाता है कि मेलों के दौरान गो-संवर्धन और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष आयोजन किए जाते थे। स्वस्थ एवं उत्कृष्ट गोवंश के पालन करने वाले पशुपालकों को सम्मानित किए जाने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।


गो-सेवा की परंपरा को संरक्षण देने की अपील

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कूलकुल्या देवी धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, इतिहास एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने सरकार और प्रशासन से इस धरोहर, मेले की परंपरा तथा प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास की मांग की है।

रिपोर्ट: राकेश कुमार दुबे

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