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 रामनगर में भारी वाहनों की अवैध पार्किंग का आरोप, रसूखदारों पर वसूली कराने के सवाल

काशीराज परिवार की संपत्ति पर महीनों से कथित तौर पर चल रहा पार्किंग का खेल, ट्रक चालकों से ₹100 से ₹150 प्रतिदिन लेने का आरोप

रामनगर (वाराणसी)। । स्थानीय थाना क्षेत्र के लंका रामलीला मैदान के पास भीटी अशोक वाटिका से सटी काशीराज परिवार की संपत्ति पर कथित अवैध पार्किंग और भारी वाहनों से शुल्क वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि संबंधित विभागों से अनुमति लिए बिना उक्त स्थान को पार्किंग स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रकों एवं अन्य भारी वाहनों को खड़ा कराकर वाहन चालकों से पैसे वसूले जा रहे हैं।


स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस स्थान पर पिछले कई महीनों से भारी वाहनों की आवाजाही और पार्किंग लगातार जारी है। वाहनों के खड़े होने से आसपास की सड़क पर यातायात प्रभावित होता है। लोगों का कहना है कि सड़क के किनारे और आसपास भारी वाहनों के खड़े रहने से जाम की स्थिति बनती है तथा वाहन चालकों और स्थानीय लोगों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति पैदा होती रहती है। लोगों ने यह भी आशंका जताई कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

ट्रक चालकों से प्रतिदिन शुल्क लेने का आरोप

आजमगढ़ निवासी एक ट्रक चालक के कथित बयान के अनुसार, इस स्थान पर ट्रक खड़ा करने के लिए 100 से 150 रुपये प्रतिदिन लिए जाते हैं। आरोप है कि जिन ट्रकों को माल सहित एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक खड़ा रखना होता है, उनसे प्रत्येक दिन के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। आसपास के कुछ वाहन चालक भी अपने माल लदे ट्रकों को यहां खड़ा कर चले जाते हैं।

आरोप यह भी है कि पार्किंग के नाम पर वाहन चालकों को रसीदें दी जाती हैं। हालांकि इन रसीदों की वैधता तथा पार्किंग संचालन के लिए किसी सक्षम विभाग से अनुमति प्राप्त होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

नो-एंट्री खुलने का इंतजार करने वाले वाहनों से भी वसूली का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पार्किंग स्थल में खड़े ट्रकों से ही नहीं, बल्कि नो-एंट्री खुलने का इंतजार कर रहे आसपास के भारी वाहनों से भी कथित रूप से शुल्क वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल पार्किंग तक सीमित न रहकर सार्वजनिक मार्ग पर खड़े वाहनों से कथित वसूली का भी बन सकता है।

पुलिस और कुछ लोगों के संरक्षण के आरोप

स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि इस कथित पार्किंग व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। कुछ लोगों ने पुलिस तथा कथित तौर पर पत्रकारिता से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम भी संरक्षण अथवा मामले को मैनेज कराने के आरोपों में लिए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिसकर्मियों अथवा जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

प्रशासन की अनुमति पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी निजी संपत्ति को व्यावसायिक पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है तो संबंधित नियमों और अनुमतियों का पालन होना चाहिए। लोगों का दावा है कि पार्किंग स्थल और शुल्क वसूली के संबंध में जिला पंचायत, ग्राम पंचायत अथवा किसी अन्य संबंधित विभाग से अनुमति लिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभागों के अभिलेखों से आधिकारिक पुष्टि होना आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में

ट्रक चालक के कथित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में सवाल उठ रहे हैं कि यदि वास्तव में बिना अनुमति पार्किंग संचालित कर भारी वाहनों से नियमित शुल्क वसूला जा रहा है तो संबंधित विभागों की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

लोग प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि पार्किंग का संचालन कौन कर रहा है, वाहन चालकों से वसूली किस आधार पर की जा रही है और पार्किंग के लिए संबंधित विभागों से कोई अनुमति ली गई है या नहीं।

पहले भी सामने आ चुका है मामला

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पार्किंग को लेकर इससे पहले भी मामला सुर्खियों में आया था। उस समय कथित तौर पर कुछ सप्ताह के लिए पार्किंग व्यवस्था बंद कर दी गई थी। अब दोबारा भारी वाहनों की पार्किंग और शुल्क वसूली के आरोप सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रामनगर जैसे व्यस्त क्षेत्र में भारी वाहनों की पार्किंग के लिए स्पष्ट व्यवस्था और यातायात नियमों का पालन जरूरी है। यदि पार्किंग वैध है तो प्रशासन को इसकी अनुमति और नियम सार्वजनिक करने चाहिए तथा यदि यह अवैध है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट: विजय कुमार वाराणसी

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