कलेक्टर के निर्देश का इंतजार या नियमों के तहत होगी जांच? रेत की वैधता पर उठे सवाल
उप खनिज अधिकारी के कथित बयान से चर्चा तेज, दो दिन पहले सूचना के बावजूद जांच नहीं होने का आरोप
बैतूल/शाहपुर। शाहपुर बस स्टैंड के सामने निर्माणाधीन हॉस्टल में कथित रूप से बिना रॉयल्टी की रेत के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही रेत की वैधता को लेकर खनिज विभाग के उप खनिज अधिकारी वशिष्ठ को करीब दो दिन पहले सूचना दी गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक मौके पर पहुंचकर जांच किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
मामले को लेकर उप खनिज अधिकारी वशिष्ठ के कथित बयान—“पत्रकार के कहने पर कार्रवाई नहीं करूंगा”—की भी चर्चा है। हालांकि, नियमानुसार किसी भी कार्रवाई का आधार केवल किसी व्यक्ति की सूचना नहीं, बल्कि विभागीय जांच, मौके की स्थिति और संबंधित दस्तावेज होने चाहिए। ऐसे में सवाल यह है कि सूचना मिलने के बाद क्या खनिज विभाग स्वयं मौके पर पहुंचकर रेत के स्रोत, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच करेगा?
क्या कलेक्टर के निर्देश का इंतजार?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मामले में कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर के निर्देश की आवश्यकता है या संबंधित विभाग अपने स्तर पर नियमों के अनुसार जांच कर सकता है।
यदि रेत की वैधता को लेकर शिकायत या सूचना प्राप्त हुई है तो मौके पर उपलब्ध रेत के स्टॉक, रॉयल्टी दस्तावेज, परिवहन संबंधी कागजात और रेत के स्रोत की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
माचना नदी से रेत लाने के आरोप
स्थानीय लोगों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि शाहपुर क्षेत्र की माचना नदी से रात के समय ट्रैक्टर-ट्रॉली और दिन में बैलगाड़ियों के माध्यम से रेत लाई जा रही है तथा निर्माण कार्य में उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा मौके पर जांच किए जाने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यदि नदी क्षेत्र से रेत का उत्खनन या परिवहन किया गया है तो यह भी जांच का विषय होगा कि संबंधित व्यक्ति के पास आवश्यक अनुमति और वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
मानसून अवधि में रेत की उपलब्धता पर भी सवाल
मानसून अवधि में रेत उत्खनन और परिवहन से जुड़े लागू नियमों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण स्थल पर मौजूद रेत का स्रोत क्या है और उसे किस दस्तावेज के आधार पर लाया गया है—इसकी जांच आवश्यक बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग मौके पर पहुंचकर रेत के स्टॉक, रॉयल्टी, परिवहन दस्तावेज और स्रोत की जांच कर ले तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा
मामले में निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ श्रमिकों का बीमा नहीं कराया गया है और वे निर्माण स्थल पर जोखिम के बीच काम कर रहे हैं।
इन आरोपों की भी संबंधित विभाग द्वारा जांच की जा सकती है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरण, सुरक्षा मानकों और श्रमिकों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कलेक्टर से जांच की मांग
पूरे मामले में जिला प्रशासन से निर्माणाधीन हॉस्टल में उपयोग हो रही रेत की जांच कराने की मांग की जा रही है। मांग है कि रेत का स्रोत, रॉयल्टी, परिवहन दस्तावेज और स्टॉक की जांच के साथ माचना नदी क्षेत्र में रेत के कथित उत्खनन और परिवहन की भी पड़ताल की जाए।
जांच में रेत वैध पाई जाती है तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अब सवाल यह है कि खनिज विभाग मौके पर कब जांच करेगा और क्या विभागीय स्तर पर मिली सूचना के आधार पर जांच की जाएगी या इसके लिए जिला प्रशासन के निर्देश का इंतजार किया जाएगा?
रिपोर्ट: दुर्गेश यादव
मध्यप्रदेश हेड, जन-जन की आवाज़ न्यूज़ 24


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