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सुबह-ए-बनारस की प्रभाती में युवा कलाकार नमन राज ने बांधा सुरों का समां

राग बिलासखानी तोड़ी में शास्त्रीय गायन से श्रोताओं को किया भावविभोर, प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित

वाराणसी। काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को समर्पित अस्सी घाट पर आयोजित सुबह-ए-बनारस की प्रभाती में सोमवार को युवा कलाकार नमन राज ने अपनी शास्त्रीय गायन की मनोहारी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुबह के सुरमयी वातावरण में नमन राज ने राग बिलासखानी तोड़ी की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को विशेष बना दिया। उनकी गायकी में सुरों की मिठास, भाव और शास्त्रीय संगीत की बारीकियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।


कार्यक्रम में नमन राज ने अपने गायन का आरंभ राग बिलासखानी तोड़ी में विलंबित एकताल में निबद्ध बंदिश ‘चाप उठाई चढ़ाई’ से किया। उन्होंने राग की गंभीरता और भावपूर्ण स्वर-विन्यास के साथ बंदिश को प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने द्रुत तीनताल में निबद्ध बंदिश ‘लंगर कांकरिया जिन मारो’ प्रस्तुत की। द्रुत लय में उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया।

नमन राज की गायकी के दौरान तबला पर सजल कश्यप तथा संवादिनी पर अश्विनी सिंह ने प्रभावी संगति करते हुए प्रस्तुति को और अधिक आकर्षक बनाया। कलाकारों के बीच सुर और ताल का सुंदर तालमेल देखने को मिला। श्रोताओं ने पूरी प्रस्तुति का आनंद लेते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में नमन राज ने देवी भजन ‘जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी’ प्रस्तुत किया। भक्ति भाव से ओतप्रोत इस प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन हुआ। सुबह के शांत वातावरण में गूंजते भजन के स्वरों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक रंग प्रदान किया।

प्रस्तुति के उपरांत युवा कलाकार नमन राज को पं. रमेश तिवारी ने प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर कलाकार की प्रस्तुति की सराहना की गई तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

कार्यक्रम का संचालन सुबह-ए-बनारस के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया। अस्सी घाट पर आयोजित इस सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से काशी की समृद्ध शास्त्रीय संगीत परंपरा को निरंतर मंच मिलता रहा है।

रिपोर्ट: विजय कुमार वाराणसी

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