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 BHU ने हेरिटेज वॉक के साथ वर्ल्ड टूरिज्म डे के जश्न की शुरुआत की

विजय कुमार वाराणसी

जन जन की आवाज न्यूज़ 24

वाराणसी,  — बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में हेरिटेज वॉक के साथ वर्ल्ड टूरिज्म डे के जश्न की शुरुआत की। इस पहल का मकसद स्टूडेंट्स और हिस्सा लेने वालों को BHU की शानदार विरासत से परिचित कराना था। इस वॉक में स्टूडेंट्स, फैकल्टी और आम लोगों ने हिस्सा लिया। यह वॉक 27 सितंबर को मनाए जाने वाले वर्ल्ड टूरिज्म डे से पहले 'सेंटर ऑफ़ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्टडीज़' (आर्ट्स फैकल्टी) द्वारा आयोजित कई गतिविधियों का हिस्सा थी। इस साल के वर्ल्ड टूरिज्म डे की थीम "डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से टूरिज्म को नया रूप देना" है।



इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8 बजे BHU के श्री विश्वनाथ मंदिर से हुई, जहाँ वाइस चांसलर प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने वॉक को हरी झंडी दिखाई। लोगों को संबोधित करते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि हेरिटेज वॉक न केवल टूरिज्म को बढ़ावा देती है, बल्कि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की समृद्ध विरासत को भी खूबसूरती से दिखाती है। इसे एक सराहनीय पहल बताते हुए वाइस चांसलर ने उम्मीद जताई कि ऐसी हेरिटेज वॉक हर साल आयोजित की जाएंगी। उन्होंने 'सेंटर ऑफ़ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्टडीज़' की स्थापना पर फैकल्टी सदस्यों और स्टूडेंट्स को बधाई भी दी।



इस मौके पर मौजूद BHU के इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर प्रो. एस. एन. संखवार ने टूरिज्म की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि टूरिज्म सांस्कृतिक विविधता की गहरी समझ देता है और हमें अलग-अलग जगहों, लोगों और परंपराओं से परिचित कराता है।



हेरिटेज वॉक 'सेंटर फॉर वैदिक साइंसेज' से शुरू होकर केमिस्ट्री डिपार्टमेंट (साइंस फैकल्टी), आर्ट्स फैकल्टी, SVDV फैकल्टी और भारत कला भवन से गुज़री और मालवीय भवन पर खत्म हुई। MTTM के स्टूडेंट्स ने वॉक के दौरान पड़ने वाले मुख्य पड़ावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। त्रिनेत्र ने विश्वनाथ मंदिर के महत्व और पंडित मदन मोहन मालवीय के स्थापना के विज़न के बारे में बात की। हर्षिद्ध ने केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के इतिहास के बारे में बताया, जिसकी स्थापना 1935 में यूनिवर्सिटी की साइंस फैकल्टी के हिस्से के तौर पर हुई थी। अन्नू यादव ने प्रतिभागियों को 'फ़ैकल्टी ऑफ़ आर्ट्स' के बारे में बताया, जो 1916 में यूनिवर्सिटी की सबसे पुरानी फ़ैकल्टी के तौर पर स्थापित हुई थी और सत्य व धर्म के मूल्यों से प्रेरित है। अलंकृता ने प्रतिभागियों को SVDV की स्थापना से जुड़ी दिलचस्प बातें बताईं। हर्ष मौर्य ने मालवीय भवन और महामना के मूल्यों व सिद्धांतों को संजोने और बढ़ावा देने में इसकी भूमिका के बारे में बात की।



वॉक के समापन पर, सेंटर ऑफ़ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्टडीज़ के कोऑर्डिनेटर प्रो. शिजु ने छात्रों की सराहनीय भागीदारी और उत्साह की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सेंटर पर यूनिवर्सिटी की विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी ज़िम्मेदारी है और इसमें सेंटर के छात्रों की अहम भूमिका है। उन्होंने छात्रों को यूनिवर्सिटी के सफ़र और इतने महान संस्थान की स्थापना में महामना के संघर्षों के बारे में और जानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सेंटर के फ़ैकल्टी सदस्यों और कार्यक्रम के आयोजन में शामिल लोगों का परिचय भी कराया। वॉक के कोऑर्डिनेटर डॉ. अनिल कुमार सिंह ने छात्रों को व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. शिखा, डॉ. प्रवीण राणा और डॉ. आर.एस. मिश्रा भी मौजूद थे और उन्होंने छात्रों के साथ वॉक में हिस्सा लिया। छात्र झंडे, पोस्टर और 'हेरिटेज वॉक' का बैनर लिए हुए थे, जबकि फ़ोटोग्राफ़ी और नारों व जयकारों ने उत्साह को और बढ़ा दिया।


हेरिटेज वॉक ने यह दिखाया कि पर्यटन केवल स्मारकों या नई जगहों की यात्रा तक ही सीमित नहीं है। यह कहानियों को समझने, यादों को संजोने, संस्कृति को समझने और लोगों को जगहों से जोड़ने के बारे में भी है।

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