भारत कला भवन में हिन्दी दिवस पर विशेष विमर्श का आयोजन
रिपोर्ट: विजय कुमार वाराणसी
जन-जन की आवाज़ न्यूज़ 24
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित भारत कला भवन में हिन्दी दिवस के अवसर पर विशेष विमर्श का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय “राय कृष्णदास : स्मृति और सृजन-यात्रा – एक आत्मीय संवाद” रखा गया। कार्यक्रम भारत कला भवन के संस्थापक एवं पद्म विभूषण राय कृष्णदास की साहित्यिक और कलात्मक विरासत को समर्पित रहा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका चंद्रा ने किया। मुख्य वक्ता प्रो. कल्याण कृष्ण, पूर्व विभागाध्यक्ष, कला इतिहास विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में राय कृष्णदास के हिन्दी साहित्य में योगदान तथा उनकी प्रसिद्ध कृतियों ‘साधना’ और ‘प्रवाल’ के साथ-साथ कला-विवेचना की भाषा के रूप में हिन्दी के प्रयोग पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में स्थापित काशी कला परिषद से भारत कला भवन तक की यात्रा हिन्दी के सांस्कृतिक बोध की यात्रा भी है।
भारत कला भवन के निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधुरी ने कहा कि राय कृष्णदास ने हिन्दी को भारतीय कला को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया और उनकी दृष्टि आज भी प्रासंगिक है। उप-निदेशक श्री निशांत ने हिन्दी को संग्रहालय शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का स्वर बताया।
कार्यक्रम संगोष्ठी कक्ष में अपराह्न 3 बजे आयोजित किया गया। इस अवसर पर महिला महाविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. स्वतंत्र सिंह, भारतेन्दु हरिश्चंद्र की प्रपौत्री श्रीमती दीपाली, कला इतिहास विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा भारत कला भवन के कर्मचारी उपस्थित
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. देवेंद्र बहादुर सिंह ने किया। अंत में हिन्दी दिवस पर हिन्दी भाषा के गौरव और सम्मान को बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल एक दिवसीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 14 से 18 सितंबर तक हिन्दी पखवाड़े के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान व्याख्यान, कविता-पाठ और संवाद सत्र सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।



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